सरद-काल
१
सरद काल
गुड़ मिला भात
मक्की की रोटी
सरसों का साग
वाह! भई क्या बात।
२
सरद काल
ख़िला ग़ुलाब
गेंदा आबाद
क़ुदरत तेरा कमाल।
३
सरद काल
ब्याह की ढ़पताल
पंडितों की मालामाल
घोड़ी बेहाल।
४
सरद काल
रजाई गद्दा का सवाल
ग़रीब के जी का जंजाल।
५
सरद काल
धूप का अकाल
बिजली की किल्लत
जीवन बेहाल।
६
सरद काल
क्रिकेट का बुख़ार
टीवी के आगे बैठने को लाचार।
(कम्प्यूटर ख़राब था इसलिए इतने दिनों बाद )


4 comments:
वाह वाह, बेहतरीन वापिसी. अब तो कम्प्यूटर ठीक हो गया, अब शूरु हो जायें.
बहुत खूब! अब नियमित लिखें!
बहुत दिनों तक खराब रहने दिया आपने कंप्यूटर !
शरद ऋतु के विभिन्न पहलुओं को इन क्षणिकाओं के माध्यम से बखूबी उभारा है आपने !
बहुत सुन्दर रचना है बाकी अभी बहुत कुछ पढने एंव समझने को बाकी है
मेरे ब्लाग http://dilkadarpan.blogspot.com पर पधार कर अपनी टिप्पणी से मेरी रचनाओं का मुल्याकंन करने की कृपा करें
विशेष रूप से मेरी एक कविता "केवल संज्ञान है" जो http://merekavimitra.blogspot.com पर प्रेषित है आप की टिप्पणी की प्रतीक्षा में है
मोहिन्दर
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