Thursday, October 22, 2009

एक नया प्रयास १५

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काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।
सौभद्र्श्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मु: पृथक् पृथक् ॥
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काशीराज औ’
महारथी शिखण्डी,
धनुर्धर से!
धृष्टदुम्न औ’
अजेय सात्यकि से!
विराट जैसे!!
सौभद्र वीर
द्रुपद औ’द्रौपद।
की शंख-घोष॥

1 comment:

Mrs. Asha Joglekar said...

अरे वाह यह तो गीता का ब्लॉग है । अच्छा लगा ।

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