Sunday, October 05, 2008

नन्हों के लिए


कबूतर
कबूतर! इतना मोटा क्यों?
ज्यों चील का पोता हो!
पंजे-चोंच लाल हैं पर!
‘ग्रे कलर’ है तेरा क्यों?


(२)

बिल्ली

बिल्ली न्यारी-न्यारी है,
‘म्यांऊँ’ करती प्यारी है।
छूने में रूई ज्यों,
पंजे इतने तेज क्यों?



(३)

डॉगी

डॉगी भौं-भौं करता है,
बात का पक्का है!
प्यार बहुत वह करता है,
मालिक के लिए मरता है!



(४)

चींटी

चींटी! इतनी छोटी हो?
मोटी क्यों नही होती हो?
भागी-भागी रहती हो,
क्यों नहीं रुकती रहती हो?

2 comments:

SA RE GA said...

AAPKE PROFILE MEIN AAPKI EMAIL ID NAHI MILI BURA LAGA. PRANTU AAP KI MAN KI BAATE PADH KARE BAHUT ACHHA LAGA. KYA IN KAVITAO KA PARYOG MEIN APNE SCHOOL KE BACHCHO KE LIYE KAR SAKTA HU. IZAZAT HO TO PLZ : hpsdabwali07@gmail.com PAR ANUMATI JARUR DENA.
AAP JAISE LEKHNI KE DHANI N KEWAL HINDI KI SEWA KARTE APITU MAN KI BAAT SE DUSRO KA BHI BHHALA KARTE H.
DHANYAVAD

Anonymous said...

सा रे गा !
आपका स्वयं कोई स्पष्ट परिचय नहीं है आश्चर्य है आप ...

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