Tuesday, August 08, 2006

रक्षाबंधन




श्रावण-मास
शुक्ल-पक्ष पूर्णिमा
रक्षाबंधन।

बहिन-भाई
राखी रोली चावल
मुँह मिठाई।

राखियाँ सोहें
भ्राता-भगिनी मोहें
खुशियाँ जो हैं।

शुभ मनाएँ
राखी बांधें या भेजें
भाई चहकें।


यह त्योहार
बाल-वृद्ध जवान
खुश समान।


बंधन-देखें
राखी नेट पर हैं
मन से सोचें।

2 comments:

Manish said...

फोटोशाप पर राखी की सुंदर झड़ियाँ लगादीं आपने तो !

MAN KI BAAT said...

dhanyavaad manIsh jI. haiku bhi to likhe hain.

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