Friday, July 21, 2006

संवेदना

संवेदना

चाहे प्राकृतिक आपदा आएँ या फिर दंगे-फसाद हों मरने वाले तो चले जाते हैं परंतु उनके परिजन और संबंधी गहन दुःख से घिर जाते हैं जिन्हें दुःख के साथ-साथ फिर से खड़ा होना भी पड़ता है। उनके लिए कुछ शब्द प्रस्तुत हैं:

रोने वालों हम तुम्हारे साथ हैं,
फिर से भर देंगे तुम्हारे दोनों हाथ हैं,
समय ज़रुर थोड़ा लगता है,
जीवन खोने का धक्का लगता है,
पर ऐसा कभी हुआ नहीं,
जो गिरने वाले पड़े रहे हों यूँहीं।
जीवन की कालिमा जाएगी,
फिर से प्रकाश की किरण आएगी।
जो चले गए वो तो लौट कर ना आएँगे,
पर स्वर्ग से ही तुम्हें देखकर मुस्कराएँगे,
अब हम तुम्हारे अपने हैं,
जो चले गए वो तो सपने हैं।
भूल जाना आसान नहीं होता,
पर याद करके भी तो रहना नहीं होता।
चलो उठो
आँसू पोंछ डालो,
अपनी सुध लो,
जीवन बदल डालो।
फिर से तुम्हें बसाएँगे,
जीवन तुम्हारे लहलहाएँगे।
आशा के साथ उठ जाओ,
नई स्फूर्ति और जान लगाओ।
उजाला पुनः अवश्य आएगा,
जीवन फिर से सुखी हो जाएगा।
परेशानी तो आ गयी है अपने आप,
पर दूर करना है उसे लगाकर शारीरिक ताप।
यह ठीक है कि दुःख आया है,
पर संकट की इस घडी़ में तुमने
पूरी दुनिया को अपने साथ पाया है।

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